Friday, 23 January 2026



पराक्रम दिवस (23 जनवरी) 

परिचय
पराक्रम दिवस भारत में हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। ‘पराक्रम’ का अर्थ है साहस, वीरता और अदम्य संकल्प—और नेताजी का पूरा जीवन इन्हीं मूल्यों का प्रतीक रहा है।


पराक्रम दिवस का इतिहास

भारत सरकार ने वर्ष 2021 से 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य देशवासियों, विशेषकर युवाओं में देशभक्ति, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और साहस की भावना को प्रोत्साहित करना है। नेताजी के योगदान को स्मरण कर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा लेना इस दिवस का मुख्य लक्ष्य है।


नेताजी सुभाष चंद्र बोस: संक्षिप्त जीवन परिचय

  • जन्म: 23 जनवरी 1897, कटक (ओडिशा)

  • माता-पिता: जानकीनाथ बोस और प्रभावती देवी

  • शिक्षा: आई.सी.एस. (Indian Civil Services) परीक्षा उत्तीर्ण की, परंतु देशसेवा के लिए नौकरी छोड़ दी

  • भूमिका: आज़ाद हिंद फौज (INA) के संस्थापक

  • नारे: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” और “जय हिंद”

नेताजी ने विदेशी शासन से मुक्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया और आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की।


पराक्रम दिवस का महत्व

  1. साहस और नेतृत्व की प्रेरणा: नेताजी का जीवन युवाओं को निर्भीक नेतृत्व की सीख देता है।

  2. देशभक्ति का संचार: स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को जीवित रखता है।

  3. राष्ट्रीय एकता: विविधता में एकता और सामूहिक प्रयास का संदेश देता है।

  4. आत्मनिर्भर भारत की भावना: स्वावलंबन और आत्मसम्मान पर बल।


पराक्रम दिवस पर आयोजन

  • विद्यालयों व महाविद्यालयों में निबंध, भाषण, चित्रकला, क्विज

  • नेताजी के जीवन पर प्रदर्शनी और डॉक्यूमेंट्री

  • देशभक्ति कार्यक्रम, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

  • सरकारी स्तर पर विशेष समारोह और श्रद्धांजलि कार्यक्रम


निष्कर्ष

पराक्रम दिवस केवल एक स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि कर्तव्य, साहस और राष्ट्रसेवा का संकल्प लेने का अवसर है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चय और पराक्रम से असंभव को संभव किया जा सकता है।








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