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Wednesday, 1 April 2026
हनुमान जयंती
Saturday, 28 February 2026
NATIONAL SCIENCE DAY
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस भारत में हर वर्ष 28 फ़रवरी को मनाया जाता है। यह दिन महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन की खोज ‘रमन प्रभाव’ की स्मृति में मनाया जाता है। 1928 में प्रस्तुत उनकी इस खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला था।
रमन प्रभाव क्या है?
रमन प्रभाव एक प्रकाशीय घटना है जिसमें प्रकाश जब किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है, तो उसकी कुछ किरणों के तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन हो जाता है। इसका उपयोग रसायन, चिकित्सा और पर्यावरण अध्ययन में किया जाता है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का इतिहास
1986 में भारत सरकार ने 28 फ़रवरी को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस घोषित किया। 1987 से पूरे देश में इसका आयोजन शुरू हुआ। हर वर्ष इस दिन की एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है।
मुख्य आयोजन
• विज्ञान प्रदर्शनी
• वैज्ञानिक व्याख्यान
• क्विज़ और प्रतियोगिताएँ
• मॉडल निर्माण और पोस्टर प्रस्तुति
• पुरस्कार और सम्मान
महत्व
यह दिन वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देता है, विज्ञान की उपयोगिता को समझाता है और छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता है।
National Science Day
National Science Day is celebrated every year on 28th February in India. This day honors the discovery of the “Raman Effect” by the great scientist C.V. Raman. He presented this discovery in 1928 and received the Nobel Prize in 1930.
What is Raman Effect?
The Raman Effect is an optical phenomenon in which some light rays change their wavelength after passing through a transparent substance. It is widely used in chemistry, medicine, and environmental studies.
History of National Science Day
In 1986, the Government of India officially declared 28 February as National Science Day. The celebration started nationwide from 1987 onward. Every year, a special theme is decided to highlight a scientific field.
Major Activities
• Science exhibitions
• Scientific lectures
• Quizzes and competitions
• Model making and poster presentation
• Awards and recognitions
Importance
This day promotes scientific thinking, explains the role of science in daily life, and encourages students to pursue careers in science and research.
Saturday, 14 February 2026
Friday, 30 January 2026
SHIHID DIWAS 30 JANUARY 2026
Saturday, 24 January 2026
Republic Day / गणतंत्र दिवस 2026
Friday, 23 January 2026
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी
1. परिचय
बसंत पंचमी भारत का एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। यह माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन से बसंत ऋतु का औपचारिक आरंभ माना जाता है। बसंत ऋतु को “ऋतुओं का राजा” कहा जाता है क्योंकि इस समय प्रकृति सबसे अधिक सुंदर और जीवंत होती है।
2. बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व
बसंत पंचमी को माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। माँ सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत, कला, वाणी और बुद्धि की देवी हैं। इस दिन विशेष रूप से:
विद्यार्थी
शिक्षक
लेखक
कलाकार और संगीतकार
माँ सरस्वती की पूजा करते हैं और ज्ञान, एकाग्रता व सफलता की कामना करते हैं।
3. बसंत पंचमी का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद देखा कि पृथ्वी नीरस और शांत है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ और संसार में ज्ञान, संगीत और वाणी का संचार हुआ। इसी कारण बसंत पंचमी को सरस्वती जयंती भी कहा जाता है।
4. सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जो उत्साह, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है।
लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले फूल चढ़ाते हैं।
कई क्षेत्रों में पतंग उड़ाने की परंपरा है, विशेषकर उत्तर भारत में।
खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है, जिससे किसानों में खुशी का माहौल होता है।
5. बसंत पंचमी की पूजा विधि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को पीले वस्त्र पर स्थापित करें।
माँ को पीले फूल, अक्षत, चंदन, और मिठाई अर्पित करें।
पुस्तकों, वाद्य यंत्रों और कलम की पूजा करें।
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
6. शिक्षा से जुड़ी मान्यताएँ
बसंत पंचमी को विद्यारंभ संस्कार के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। छोटे बच्चों को इस दिन पहली बार अक्षर लिखवाए जाते हैं। इसी कारण यह दिन शिक्षा की शुरुआत के लिए विशेष होता है।
7. भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बसंत पंचमी
पश्चिम बंगाल: इसे सरस्वती पूजा के रूप में भव्य तरीके से मनाया जाता है।
पंजाब और हरियाणा: पतंगबाजी और लोकगीतों का आयोजन होता है।
उत्तर प्रदेश और बिहार: धार्मिक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
8. बसंत पंचमी का संदेश
बसंत पंचमी हमें यह संदेश देती है कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में ज्ञान, सकारात्मकता और रचनात्मकता को अपनाना चाहिए।
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बसंत पंचमी / Basant Panchami
| बसंत पंचमी (हिंदी) | Basant Panchami (English) |
|---|---|
परिचय
धार्मिक महत्व
पारंपरिक मान्यताएँ
महत्व
|
Introduction
Religious Significance
Traditional Beliefs
Importance
|
पराक्रम दिवस (23 जनवरी)
परिचय
पराक्रम दिवस भारत में हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। ‘पराक्रम’ का अर्थ है साहस, वीरता और अदम्य संकल्प—और नेताजी का पूरा जीवन इन्हीं मूल्यों का प्रतीक रहा है।
पराक्रम दिवस का इतिहास
भारत सरकार ने वर्ष 2021 से 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य देशवासियों, विशेषकर युवाओं में देशभक्ति, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और साहस की भावना को प्रोत्साहित करना है। नेताजी के योगदान को स्मरण कर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा लेना इस दिवस का मुख्य लक्ष्य है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: संक्षिप्त जीवन परिचय
जन्म: 23 जनवरी 1897, कटक (ओडिशा)
माता-पिता: जानकीनाथ बोस और प्रभावती देवी
शिक्षा: आई.सी.एस. (Indian Civil Services) परीक्षा उत्तीर्ण की, परंतु देशसेवा के लिए नौकरी छोड़ दी
भूमिका: आज़ाद हिंद फौज (INA) के संस्थापक
नारे: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” और “जय हिंद”
नेताजी ने विदेशी शासन से मुक्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया और आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की।
पराक्रम दिवस का महत्व
साहस और नेतृत्व की प्रेरणा: नेताजी का जीवन युवाओं को निर्भीक नेतृत्व की सीख देता है।
देशभक्ति का संचार: स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को जीवित रखता है।
राष्ट्रीय एकता: विविधता में एकता और सामूहिक प्रयास का संदेश देता है।
आत्मनिर्भर भारत की भावना: स्वावलंबन और आत्मसम्मान पर बल।
पराक्रम दिवस पर आयोजन
विद्यालयों व महाविद्यालयों में निबंध, भाषण, चित्रकला, क्विज
नेताजी के जीवन पर प्रदर्शनी और डॉक्यूमेंट्री
देशभक्ति कार्यक्रम, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
सरकारी स्तर पर विशेष समारोह और श्रद्धांजलि कार्यक्रम
निष्कर्ष
पराक्रम दिवस केवल एक स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि कर्तव्य, साहस और राष्ट्रसेवा का संकल्प लेने का अवसर है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चय और पराक्रम से असंभव को संभव किया जा सकता है।
















