Friday, 30 January 2026

SHIHID DIWAS 30 JANUARY 2026

Shahid Diwas
हिंदी English

शहीद दिवस – भूमिका

शहीद दिवस भारत में 30 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह दिवस हमें बलिदान, देशभक्ति और त्याग की भावना की याद दिलाता है।

Shahid Diwas – Introduction

Shahid Diwas is observed in India on 30th January. This day is dedicated to the brave freedom fighters who sacrificed their lives for the nation. It reminds us of patriotism, sacrifice, and devotion to the country.

शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है

शहीद दिवस महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। यह दिन हमें अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

Why Shahid Diwas is Observed

Shahid Diwas is observed as the martyrdom day of Mahatma Gandhi. On 30 January 1948, the Father of the Nation was assassinated. This day inspires us to follow the path of truth and non-violence.

शहीद दिवस का महत्व

शहीद दिवस का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह हमें देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों का सम्मान करना सिखाता है। यह दिन नागरिकों में राष्ट्रप्रेम और एकता की भावना को मजबूत करता है।

Importance of Shahid Diwas

Shahid Diwas holds great importance as it teaches us to respect the martyrs who laid down their lives for the nation. It strengthens the feeling of unity and patriotism among citizens.

शहीद दिवस कैसे मनाया जाता है

इस दिन देशभर में प्रार्थना सभाएँ, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और मौन धारण किया जाता है। विद्यालयों और संस्थानों में देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

How Shahid Diwas is Observed

On this day, prayer meetings, tribute ceremonies, and moments of silence are observed across the country. Patriotic programs are organized in schools and institutions.

शहीदों से मिलने वाली सीख

शहीदों का जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, साहस और देश के प्रति समर्पण की सीख देता है। हमें उनके आदर्शों को अपनाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए।

Lessons from Martyrs

The lives of martyrs teach us selfless service, courage, and dedication towards the nation. We should adopt their ideals and become responsible citizens.

उपसंहार

शहीद दिवस केवल एक तिथि नहीं बल्कि बलिदान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि देश की स्वतंत्रता अनमोल है और इसकी रक्षा हमारा कर्तव्य है।

Conclusion

Shahid Diwas is not just a date but a symbol of sacrifice and patriotism. It reminds us that freedom is precious and protecting it is our responsibility.

Saturday, 24 January 2026

Republic Day / गणतंत्र दिवस 2026

Republic Day – Hindi & English
Republic Day / गणतंत्र दिवस

परिचय
गणतंत्र दिवस भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है। यह हर वर्ष 26 जनवरी को पूरे देश में गर्व और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
Introduction
Republic Day is one of the most important national festivals of India. It is celebrated every year on 26 January with pride.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
Historical Background
On 26 January 1950, the Constitution of India came into force and the country became a democratic republic.
संविधान का महत्व
भारतीय संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार, समानता और कर्तव्य प्रदान करता है।
Importance of the Constitution
The Constitution guarantees fundamental rights, equality, and duties to all citizens.
गणतंत्र दिवस समारोह
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
Republic Day Celebrations
A grand parade and cultural programs are held at Kartavya Path, New Delhi.
उपसंहार
यह दिवस हमें संविधान का सम्मान करने और देश की एकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
Conclusion
This day inspires us to respect the Constitution and work for national unity.

Friday, 23 January 2026

बसंत पंचमी




                                                            बसंत पंचमी 

1. परिचय


बसंत पंचमी भारत का एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। यह माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन से बसंत ऋतु का औपचारिक आरंभ माना जाता है। बसंत ऋतु को “ऋतुओं का राजा” कहा जाता है क्योंकि इस समय प्रकृति सबसे अधिक सुंदर और जीवंत होती है।


2. बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व


बसंत पंचमी को माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। माँ सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत, कला, वाणी और बुद्धि की देवी हैं। इस दिन विशेष रूप से:

  • विद्यार्थी

  • शिक्षक

  • लेखक

  • कलाकार और संगीतकार

माँ सरस्वती की पूजा करते हैं और ज्ञान, एकाग्रता व सफलता की कामना करते हैं।


3. बसंत पंचमी का पौराणिक महत्व


पौराणिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद देखा कि पृथ्वी नीरस और शांत है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ और संसार में ज्ञान, संगीत और वाणी का संचार हुआ। इसी कारण बसंत पंचमी को सरस्वती जयंती भी कहा जाता है।


4. सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व


  • इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जो उत्साह, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है।

  • लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले फूल चढ़ाते हैं।

  • कई क्षेत्रों में पतंग उड़ाने की परंपरा है, विशेषकर उत्तर भारत में।

  • खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है, जिससे किसानों में खुशी का माहौल होता है।


5. बसंत पंचमी की पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।

  • माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को पीले वस्त्र पर स्थापित करें।

  • माँ को पीले फूल, अक्षत, चंदन, और मिठाई अर्पित करें।

  • पुस्तकों, वाद्य यंत्रों और कलम की पूजा करें।

  • “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें।


6. शिक्षा से जुड़ी मान्यताएँ


बसंत पंचमी को विद्यारंभ संस्कार के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। छोटे बच्चों को इस दिन पहली बार अक्षर लिखवाए जाते हैं। इसी कारण यह दिन शिक्षा की शुरुआत के लिए विशेष होता है।


7. भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बसंत पंचमी

  • पश्चिम बंगाल: इसे सरस्वती पूजा के रूप में भव्य तरीके से मनाया जाता है।

  • पंजाब और हरियाणा: पतंगबाजी और लोकगीतों का आयोजन होता है।

  • उत्तर प्रदेश और बिहार: धार्मिक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।


8. बसंत पंचमी का संदेश


बसंत पंचमी हमें यह संदेश देती है कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में ज्ञान, सकारात्मकता और रचनात्मकता को अपनाना चाहिए।



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Basant Panchami

बसंत पंचमी / Basant Panchami

बसंत पंचमी (हिंदी) Basant Panchami (English)

परिचय

  • बसंत पंचमी भारत का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है।
  • यह माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।
  • यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।

धार्मिक महत्व

  • इस दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।
  • छात्र विद्या, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं।
  • कई स्थानों पर बच्चों की शिक्षा का आरंभ इसी दिन किया जाता है।

पारंपरिक मान्यताएँ

  • पीला रंग शुभ माना जाता है।
  • लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पतंग उड़ाते हैं।
  • केसरिया खीर, पीले चावल और लड्डू बनाए जाते हैं।

महत्व

  • यह पर्व ज्ञान, सकारात्मकता और नई शुरुआत का संदेश देता है।
  • किसानों के लिए यह अच्छी फसल की आशा का प्रतीक है।

Introduction

  • Basant Panchami is an important and auspicious Indian festival.
  • It is celebrated on the fifth day of the bright half of the month of Magha.
  • The festival marks the arrival of the spring season.

Religious Significance

  • Goddess Saraswati, the goddess of knowledge and wisdom, is worshipped.
  • Students seek blessings for education and success.
  • Many people begin learning activities on this day.

Traditional Beliefs

  • Yellow color is considered sacred and joyful.
  • People wear yellow clothes and fly kites.
  • Special yellow dishes like saffron rice and sweets are prepared.

Importance

  • The festival symbolizes learning, positivity, and new beginnings.
  • For farmers, it represents hope for a good harvest.




पराक्रम दिवस (23 जनवरी) 

परिचय
पराक्रम दिवस भारत में हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। ‘पराक्रम’ का अर्थ है साहस, वीरता और अदम्य संकल्प—और नेताजी का पूरा जीवन इन्हीं मूल्यों का प्रतीक रहा है।


पराक्रम दिवस का इतिहास

भारत सरकार ने वर्ष 2021 से 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य देशवासियों, विशेषकर युवाओं में देशभक्ति, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और साहस की भावना को प्रोत्साहित करना है। नेताजी के योगदान को स्मरण कर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा लेना इस दिवस का मुख्य लक्ष्य है।


नेताजी सुभाष चंद्र बोस: संक्षिप्त जीवन परिचय

  • जन्म: 23 जनवरी 1897, कटक (ओडिशा)

  • माता-पिता: जानकीनाथ बोस और प्रभावती देवी

  • शिक्षा: आई.सी.एस. (Indian Civil Services) परीक्षा उत्तीर्ण की, परंतु देशसेवा के लिए नौकरी छोड़ दी

  • भूमिका: आज़ाद हिंद फौज (INA) के संस्थापक

  • नारे: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” और “जय हिंद”

नेताजी ने विदेशी शासन से मुक्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया और आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की।


पराक्रम दिवस का महत्व

  1. साहस और नेतृत्व की प्रेरणा: नेताजी का जीवन युवाओं को निर्भीक नेतृत्व की सीख देता है।

  2. देशभक्ति का संचार: स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को जीवित रखता है।

  3. राष्ट्रीय एकता: विविधता में एकता और सामूहिक प्रयास का संदेश देता है।

  4. आत्मनिर्भर भारत की भावना: स्वावलंबन और आत्मसम्मान पर बल।


पराक्रम दिवस पर आयोजन

  • विद्यालयों व महाविद्यालयों में निबंध, भाषण, चित्रकला, क्विज

  • नेताजी के जीवन पर प्रदर्शनी और डॉक्यूमेंट्री

  • देशभक्ति कार्यक्रम, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

  • सरकारी स्तर पर विशेष समारोह और श्रद्धांजलि कार्यक्रम


निष्कर्ष

पराक्रम दिवस केवल एक स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि कर्तव्य, साहस और राष्ट्रसेवा का संकल्प लेने का अवसर है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चय और पराक्रम से असंभव को संभव किया जा सकता है।








Thursday, 15 January 2026

पोंगल पर्व (PONGAL FESTIVAL)

पोंगल पर्व (PONGAL FESTIVAL)

पोंगल दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु का एक प्रमुख और पारंपरिक फसल पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य देवप्रकृतिपशुधन और किसानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। पोंगल सामान्यतः 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है और यह चार दिनों तक चलता है।


पोंगल का अर्थ

तमिल भाषा में “पोंगल” का अर्थ है उफनना या उबाल आना। इस दिन नए चावल, दूध और गुड़ से बना प्रसाद जब उबलकर बाहर आता है, तो उसे शुभ माना जाता है। यह समृद्धि, खुशहाली और अच्छे भविष्य का प्रतीक है।


पोंगल पर्व के चार दिन

1. भोगी पोंगल

यह पर्व का पहला दिन होता है।

  • पुराने और अनुपयोगी सामान को जलाकर नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

  • घरों की सफाई की जाती है।

  • इंद्र देव की पूजा की जाती है।


2. थाई पोंगल (सूर्य पोंगल)

यह मुख्य दिन होता है।

  • सूर्य देव को धन्यवाद दिया जाता है।

  • नए चावल, दूध और गुड़ से पोंगल प्रसाद बनाया जाता है।

  • घरों के सामने सुंदर कोलम (रंगोली) बनाई जाती है।

  • लोग पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं।


3. मट्टू पोंगल

यह दिन पशुओं, विशेषकर गाय और बैलों को समर्पित होता है।

  • पशुओं को सजाया जाता है।

  • उन्हें विशेष भोजन दिया जाता है।

  • किसान पशुओं के योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हैं।


4. कानुम पोंगल

यह आनंद और पारिवारिक मेल-मिलाप का दिन होता है।

  • लोग रिश्तेदारों और मित्रों से मिलते हैं।

  • पिकनिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

  • बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं।


पोंगल का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

  • यह पर्व कृषि संस्कृति से जुड़ा हुआ है।

  • प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान सिखाता है।

  • सामाजिक एकता और पारिवारिक प्रेम को बढ़ावा देता है।

  • यह पर्व मकर संक्रांति के आसपास मनाया जाता है।


निष्कर्ष

पोंगल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि कृतज्ञता, समृद्धि और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि हम प्रकृति और पशुओं के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। पोंगल भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दर्शाने वाला एक सुंदर और प्रेरणादायक पर्व है।

 

                                     

Tuesday, 13 January 2026

मकर संक्रांति (उत्तरायण)



मकर संक्रांति (उत्तरायण) 

मकर संक्रांति भारत के प्रमुख एवं प्राचीन पर्वों में से एक है। यह पर्व हर वर्ष जनवरी माह में 14 या 15 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इसी दिन से सूर्य की उत्तर दिशा की गति प्रारंभ होती है, जिसे उत्तरायण कहते हैं। यही कारण है कि इस पर्व को मकर संक्रांति के साथ-साथ उत्तरायण भी कहा जाता है।

धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगा, यमुना, गोदावरी और नर्मदा जैसी नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। प्रयागराज का माघ मेला भी इसी समय प्रारंभ होता है। इस दिन तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

वैज्ञानिक और खगोलीय महत्व

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व भी है। यह एकमात्र भारतीय पर्व है जो सूर्य की खगोलीय स्थिति पर आधारित है, इसलिए इसकी तिथि लगभग निश्चित रहती है। उत्तरायण के बाद दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती हैं। सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ने लगती हैं, जिससे ठंड धीरे-धीरे कम होती है और मौसम में परिवर्तन आने लगता है।

कृषि से संबंध

मकर संक्रांति का सीधा संबंध कृषि से है। इस समय रबी की फसल पककर तैयार होती है। किसान अपनी मेहनत का फल पाकर प्रसन्न होते हैं और ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करते हैं। नई फसल से बने व्यंजन भगवान को अर्पित किए जाते हैं। यह पर्व किसानों के जीवन में खुशी, आशा और समृद्धि का प्रतीक है।

विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति

भारत की विविधता इस पर्व में स्पष्ट दिखाई देती है।

  • उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है।

  • गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण के रूप में पतंगोत्सव के साथ मनाया जाता है।

  • पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है।

  • तमिलनाडु में पोंगल चार दिनों तक मनाया जाता है।

  • असम में इसे भोगाली बिहू कहा जाता है।

हर क्षेत्र में परंपराएँ अलग-अलग हैं, परंतु पर्व का उद्देश्य एक ही है—खुशी, समृद्धि और एकता।

तिल-गुड़ का महत्व

मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन जैसे तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी और खिचड़ी विशेष रूप से बनाए जाते हैं। तिल शरीर को गर्मी देता है और गुड़ ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए सर्दियों में इनका सेवन लाभकारी माना जाता है। तिल-गुड़ आपसी प्रेम, मधुरता और सौहार्द का प्रतीक भी है।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

यह पर्व सामाजिक समरसता का संदेश देता है। लोग पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे से मिलते हैं, शुभकामनाएँ देते हैं और खुशियाँ बाँटते हैं। पतंग उड़ाना, मेलों का आयोजन और सामूहिक भोज इस पर्व को और भी उल्लासपूर्ण बनाते हैं।

उपसंहार

मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, विज्ञान, धर्म और संस्कृति का सुंदर संगम है। यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से आशा की ओर और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसलिए मकर संक्रांति (उत्तरायण) भारतीय जीवन-दर्शन और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।








Sunday, 11 January 2026

National Youth Day









National Youth Day

Introduction

India is a youth-dominated country. The role of youth is extremely important in the progress and development of the nation. To develop self-confidence, character building, patriotism, and a spirit of service among the youth, National Youth Day is celebrated every year on 12 January. This day is observed on the birth anniversary of the great thinker, philosopher, and social reformer Swami Vivekananda.


Reasons for Celebrating National Youth Day

Swami Vivekananda inspired the youth to become self-reliant, courageous, and aware through his thoughts and actions. His ideas continue to guide young people even today. Therefore, the Government of India decided to celebrate Swami Vivekananda’s birth anniversary as National Youth Day starting from the year 1984.


Life of Swami Vivekananda

Swami Vivekananda was born on 12 January 1863 in Kolkata. His childhood name was Narendranath Dutta. From a young age, he was brilliant, intelligent, and curious. He accepted Ramakrishna Paramahamsa as his guru and gained spiritual knowledge under his guidance.

In 1893, his speech at the World Parliament of Religions in Chicago brought great pride to India on the global stage. He spread the message of Vedanta and Indian culture across the world.


Teachings of Swami Vivekananda

Arise, awake, and do not stop until the goal is achieved.


Develop self-confidence and inner strength.


Service to humanity is the true religion.


Character building should be the main objective of education.


Emphasis on women empowerment and equality.


Role of National Youth Day


National Youth Day makes young people aware of their duties and responsibilities. It inspires them to serve society, the nation, and humanity, and helps in developing moral values among them.


Objectives


To spread the thoughts and ideals of Swami Vivekananda among the youth


To create self-reliant and responsible citizens


To increase youth participation in nation-building


To promote moral, mental, and physical development


Activities Conducted on This Day


Speech, essay, and debate competitions


Posters and exhibitions on the thoughts of Swami Vivekananda


Yoga, meditation, and sports activities


Cultural programs


Social service activities and awareness rallies


Message for the Youth


Swami Vivekananda gave a clear message to the youth to recognize the hidden power within themselves. They should move forward with self-confidence, discipline, and a spirit of service. Instead of fearing difficulties, they should accept them as challenges and actively contribute to nation-building.


Conclusion

National Youth Day reminds us that the future of the country lies in the hands of the youth. If young people work in the right direction, India can become a world leader. The ideas of Swami Vivekananda are as relevant today as ever. By adopting his ideals, we can build a strong, prosperous, and cultured nation.

                              राष्ट्रीय युवा दिवस

प्रस्तावना

भारत एक युवा प्रधान देश है। देश की उन्नति और विकास में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना का विकास करने हेतु प्रतिवर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस महान विचारक, दार्शनिक और समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।


राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के कारण

स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों और कर्मों से युवाओं को आत्मनिर्भर, साहसी और जागरूक बनने की प्रेरणा दी। उनके विचार आज भी युवाओं को सही दिशा प्रदान करते हैं। इसी कारण भारत सरकार ने वर्ष 1984 से स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।


स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही तेजस्वी, बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु माना और उनके सान्निध्य में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया।

1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके भाषण ने भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। उन्होंने वेदांत और भारतीय संस्कृति का संदेश पूरे विश्व में फैलाया।


स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ

उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।


आत्मविश्वास और आत्मबल का विकास करो।


सेवा ही सच्चा धर्म है।


चरित्र निर्माण शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।


नारी सशक्तिकरण और समानता पर बल।



राष्ट्रीय युवा दिवस की भूमिका

राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करता है। यह दिवस युवाओं को समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करता है तथा उनमें नैतिक मूल्यों का विकास करता है।


उद्देश्य


युवाओं में स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रचार-प्रसार


आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना


राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना


नैतिक, मानसिक और शारीरिक विकास को प्रोत्साहन देना


इस दिवस पर होने वाली गतिविधियाँ


भाषण, निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ


स्वामी विवेकानंद के विचारों पर पोस्टर व प्रदर्शनी


योग, ध्यान और खेल गतिविधियाँ


सांस्कृतिक कार्यक्रम


सेवा कार्य एवं जागरूकता रैलियाँ


युवाओं के लिए संदेश


स्वामी विवेकानंद का युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश था कि वे अपने अंदर छिपी शक्ति को पहचानें। आत्मविश्वास, अनुशासन और सेवा भावना के साथ आगे बढ़ें। कठिनाइयों से डरने के बजाय उन्हें चुनौती समझें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।


उपसंहार


राष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है। यदि युवा सही दिशा में कार्य करें तो भारत विश्व गुरु बन सकता है। स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। हमें उनके आदर्शों को अपनाकर एक सशक्त, समृद्ध और संस्कारित राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए।